Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
तथाप्याक्रान्तवान्विश्व ज्ञातो गोपायति क्षणात् ।
जगद्धानाकणं बाल इवाहो घनमायिता ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार के प्रकाशस्वरूप पूर्णात्मा की बालक के तुल्य आत्मविस्मृति कैसे हो सकती है,
इस पर कहते हैं।
उसकी माया अपार है, माया की सामर्थ्य से ही यब सब आश्चर्य कर आत्मविस्मृति आदि
होते हैं