Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 104
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 104 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 104
संस्कृत श्लोक
बिसतन्तुर्महामेरुः परमाणोरपेक्षया ।
दृश्यं किल विशेत्तन्तुरदृश्याक्ष्णा पराणुता ॥ १०४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राजन्, जिसकी अपेक्षा स्थूल होने के कारण बिसतन्तु (कमल-नाल का तंतु) महामेरू
है, वह कौन है ? इस प्रश्न का उत्तर देते है।
परमाणु की अपेक्षा स्थूल होने के कारण बिसतन्तु महामेरू है, क्योकि बिसतन्तु दृष्टिगोचर
होता है और परमाणुता नेत्र से दृश्य नहीं है