Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
गम्यं यस्य शरीरस्थं क्व किलासौ प्रयाति हि ।
कुचकोटरगः पुत्रः किं मात्रान्यत्र वीक्ष्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
गमन द्वारा प्राप्त होनेवाला देश
जिसके शरीर के अन्दर ही स्थित है, वह कहाँ जाय ? क्या माता अपनी गोद में सोये हुए बच्चे
को दूसरी जगह खोजती है ?