Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
न गच्छत्येष यातोऽपि संप्राप्तोऽपि च नागतः ।
स्वसत्ताकाशकोशान्तर्वासित्वाद्देशकालयोः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
कौन स्थित न रहता हुआ भी स्थित रहता है, इसका भी उत्तर उसी ढंग से देते हैं ।
गया हुआ भी यह नहीं जाता, प्राप्त हुआ भी नहीं आया, क्योंकि देश और काल उसकी
सत्ता से सत्तावाले आकाश कोश के अन्दर ही स्थित हैं