Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 78, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 78, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
त्वादृशानां सहस्राणि मशकानामिवाबले ।
अस्माकं धीरतावात्याव्यूढानि तृणपर्णवत् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अबले ! तुम्हारे जैसे
हजारों मच्छर हम लोगों की धीरतारूपी ओंधी से तिनके ओर सूखे हुए पत्तों के समान उड़ाये
गये है । इसलिए भी तुम्हारा दण्डप्रयोग करना उचित नहीं है