Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 78, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 78, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
संरम्भद्वारमुत्सृज्य समतास्वच्छया धिया ।
युक्ता च व्यवहारिण्या स्वार्थः प्राज्ञेन साध्यते ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि राक्षसी की ओर से प्रश्न हो कि मेरी स्वार्थसिद्धि कैसे होगी 2 तो इस पर कहते है ।
इस कोपरूपी उपाय का त्यागकर समता से स्वच्छ हुई बुद्धि से ओर प्राज्ञ के व्यवहार के
योग्य युक्ति से प्राज्ञ पुरुष अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं