Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
ततस्ततः प्रभृत्येषा सूची दीर्घतपस्विनी ।
अरण्यान्यां स्थिता शक्र तत्र वर्षगणान्बहून् ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे इन्द्र, तदनन्तर तभी से लेकर यह दीर्घ तपस्या करनेवाली सूची बहुत वर्षो से उक्त जंगल
में तप कर रही है