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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 48

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

तस्या वरार्थं यत्नं त्वं कुरु कर्तव्यकोविद । चिरेण संभृतं लोकमलं दग्धुं हि तत्तपः ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे कर्तव्यार्थ का निर्णय करने मेँ परम कुशल देवराज, उसको वरदान द्वारा ठगने के लिए आप प्रयत्न कीजिए, क्योंकि उसकी तपस्या चिरकाल से परिपालित लोक को जलाने में अत्यन्त समर्थ है