Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
सर्वप्राणिशरीरेषु भान्ति चिच्छक्तयस्तथा ।
दीपप्रभाभासितया गृहिण्येव स्वसद्मसु ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोड शंका करे कि प्रत्येक देहरूपी धर में उसने कैसे विहार किया 2 तो उस पर
कहते हैं ।
सम्पूर्ण प्राणियों के शरीरों में जैसे प्राणवायु अपना व्यापार करता है, वैसे ही चित्-
शक्त्य भी उनमें भासित होती हैं, जैसे गृहिणी अपने घर में दीपप्रभा से भासित होकर
व्यवहार करती है, वैसे ही पूर्वोक्त चित्शक्ति रूपी प्रभा से भासित होकर उसने प्रत्येक
प्राणी के शरीररूपी घर में विहार किया