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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verses 12–13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verses 12–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 12,13

संस्कृत श्लोक

सर्वाङ्गकोशनाडीषु दिक्ष्विवानिललेखया । उड्डीनमवडीनं च काचौघव्योमवीथिषु ॥ १२ ॥ विराडात्महृदि प्राणवातस्पन्दाः स्फुरन्ति तु । यथा तथा प्रस्फुरितं प्रतिदेहगृहं तया ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे वायु-लेखा दिशाओं में नीचे ओर ऊपर उडती है, वैसे ही सम्पूर्ण प्राणियों के शरीरो की नाडयो में तथा काँच के समान नीले आकाश में वह ऊपर नीचे उडती थी । जैसे समष्टि प्राणवायुका स्पन्द विराट्‌ के हृदय में स्फुरित होता हे, वैसे ही प्रत्येक देहरूपी घर में उसका स्फुरण होता था