Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 66
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verse 66 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
विना परापकारेण तीक्ष्णा मरणमीहते ।
वेदनाद्रोधिता सूची कर्मपाशे प्रलम्बते ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसकी दुर्दशा होना ठीक ही है, ऐसा कहते है।
चूँकि वह सूचिका अपने अपकार के बिना ही दूसरों का मरण चाहती है, इसलिए उस पाप
के कारण अपनी बुद्धि से ही वह तागे मेँ बँधकर अपने कर्मरूप जाल में ही लटकती रहती
हे