Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verses 28–29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verses 28–29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 28,29
संस्कृत श्लोक
एवमस्यास्तनुर्जाता सूचीद्वयमयी हि सा ।
नीहारांशुकवत्तन्वी कार्पासांशुसुपेलवा ॥ २८ ॥
तनुद्वयेन तेनासौ प्रविश्य हृदयं नृणाम् ।
वेधयन्ती ततः क्रूरा प्रबभ्राम दिशो दश ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार उस कर्कटी की दो प्रकार की सूचिकारूप देह
उत्पन्न हुई । वह कुहरेरूपी वस्त्र के सदृश सूक्ष्म और कपास के (सूती) वस्त्र के समान कोमल
थी । उन दो शरीरो से मनुष्यों के हृदयों में प्रवेश कर उन्हें पीडित करती हुई वह क्रूर राक्षसी
दसो दिशाओं मे घूमती थी