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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

अचेत्यचित्स्वरूपं यत्तच्चासंभवनं विना । क्व स्वरूपोन्मुखत्वं हि केवलं चेत्यरोधतः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार ज्ञान के बिना मोक्ष भी दुर्लभ है, ऐसा कहते हैं। जो मोक्षनामक अचेत्य चित्स्वरूप है, वह पूर्वोक्त चेत्य के (दृश्य के) असम्भव के बिना (ज्ञानद्वारा समूल बाध के बिना) कैसे प्राप्त हो सकता है ? जबकि समाधि में केवल ब्रह्मस्वरूपोन्मुखता भी दृश्य के बाधसे ही होती है, तब मोक्ष में दृश्यस्वरूप के बाध की आवश्यकता के विषय में कहना ही क्या है 2