Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
तस्य चेत्योन्मुखत्वं तु चेत्यासंभवनं विना ।
रोद्धुं न शक्यते दृश्यं चेत्यं शाम्यति वै कथम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि ऐसी बात है, तो चित्तनिरोधरूप योग से ही जीव की चेत्य पदार्थों की ओर प्रवणता
रोकी जा सकती है, फिर उसके लिए ज्ञानार्थ प्रयास की क्या आवश्यकता है ? इश शंका पर
कहते हैं।
चेत्य का (दृश्य का) ज्ञान से समूल विनाश किये बिना जीव का दृश्य पदार्थो के प्रति
आकर्षण नहीं रोका जा सकता | भला बतलाइये, ज्ञान के बिना दृश्य जगत् का उच्छेद ही कैसे
हो सकता है ? भाव यह कि ज्ञान के बिना पूर्वोक्त ब्रह्मस्वरूपसमाधि नहीं हो सकती