Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः ।
क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन्दृष्टे परावरे ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
इस विषय में श्रुतिरूप प्रमाण उपस्थित करतेहै।
उस परब्रह्म परमात्मा का साक्षात्कार होने पर मूलाज्ञान के विनाश से इस जीव की
मूलाज्ञान की कार्य अन्तःकरण में तादात्म्याध्यासरूप हृदयग्रन्थि टूट जाती है, उसके नाश
से तन्मूलक सम्पूर्ण सन्देह भी छिन्न-भिन्न हो जाते हैं और संचित आदि सम्पूर्ण कर्म
विनष्ट हो जाते हैं