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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

य एवानुभवात्मायं चित्स्पन्दोऽस्ति स एव हि । जीवकारणकर्माख्यो बीजमेतद्धि संसृतेः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

जीव, कारण, कर्म ओर दैव की ज्ञानरूप ब्रह्म की सत्ता के अवलम्बन से ही सत्ता और अपना कार्य करने की क्षमता है, ऐसा कहते है । फलतः जो ही ज्ञानरूप है, वही उक्तरूप से चित्‌ का स्पन्द (स्फुरण) है और वही जीव, कारण ओर कर्म नामवाला है एवं वह संसार का बीज हे