Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
तादृक्षवेदनात्सोऽथ घ्राणं तद्दृष्टिवेदनात् ।
स्थितो यस्मिन्भवतीति तावद्दृश्यादिता स्थिता ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर शरीरपिण्ड में अस्फुट अहंभाव के ज्ञान से
घ्राणेन्द्रिय के दर्शन के संकल्प से घ्राण हो जाता है, इस प्रकार श्रोत्र आदि के भाव में भी
जबतक वह स्थित रहता है, तबतक शब्द आदि दृश्य का उपभोग करने का उसका स्वभाव हो
जाता है