Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
तादृक्षवेदनात्तेजःशब्दार्थोन्मुखतां गतः ।
भविष्यन्नेत्रनाम्नैकदेशे भवति भासनम् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्त शरीरपिण्ड में अस्फुट अहंभाव के ज्ञान से चक्षुरिन्द्रिय ओर
उसके विषय रूप की ओर उन्मुख हुआ जीव शरीर के एक देश चक्षुगोलक में भावी नेत्रनाम से
उपलक्षित चक्षुरिन्द्रिय होता है