Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
यथा ब्रह्म भवत्याशु जीवः कलनजीवितः ।
तथा जीवो भवत्याशु मनो मननवेदनात् ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे ब्रह्म शीघ्र जीव, जिसका कल्पना ही स्वरूप है, हो जाता है, वैसे ही जीव
मननवासना से उत्पन्न होने के कारण मन बन जाता है