Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
चिद्धनैकप्रपातस्य रूढस्य परमे पदे ।
नैरात्म्यशून्यवेद्याद्यैः पर्यायैः कथनं भवेत् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसका ध्यान निरन्तर चिद्घन के सिवा
अन्य विषयमें नहीं रहता है, अतएव चिद्घनरूप परमपदमें आरूढ यानी निर्विकल्प समाधि
तथा आत्मसाक्षात्कार से युक्त चित्तका नैरात्म्य (स्वरूपशून्यता), शून्यवेद्य (निर्विषयता)
आदि पर्ययशब्दोसे प्रतिपादन होता हे