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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, Verse 5

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

तस्य यत्सममापूर्णं शुद्धं सत्वमचिह्नितम् । तद्विदामप्यनिर्देश्यं तच्छान्तं परमं पदम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

उनमें से पहले को दशति है। उसका जो सम, परिपूर्ण, शुद्ध, चिह्नरहित सत्स्वरूप है, जिसका कि ज्ञानी भी निर्देश नहीं कर सकते, वह शान्त परम पद है