Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
चित्तं स्वभावात्स्फुरति चित्तः फेन इवाम्भसः ।
कर्मभिर्बध्यते पश्चाड्डिण्डीरमिव रज्जुभिः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे जल से फेन (गाज) निकलता हे, वैसे ही
चिदात्मा से स्वभावतः चित्त (जीव) आविर्भूत होता है, जैसे नाव आदि की रस्सियों से जलसे
निकला हुआ फेन पीछे बँधता है, जल नहीं बँधता है, वैसे ही पीछे जीव ही देहबन्धक कर्मो से
बन्धनको प्राप्त होता है, चिदात्मा बन्धन में नहीं पड़ता