Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
स्पन्दितव्यं पदार्थेन भाव्यं वा भोक्तृतापदम् ।
अनेनेत्थमनेनेत्थमवश्यमिति दैवधीः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
अमुक पदार्थ में इस प्रकार स्पन्द होना
चाहिए, अमुक को भोक्ता पद प्राप्त होना चाहिए, इससे इस प्रकार अवश्य होना चाहिए, इस
प्रकार दैव ही नियति है