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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

एषा दैवमिति प्रोक्ता सर्वं सकलकालगम् । पदार्थमलमाक्रम्य शुद्धा चिदिति संस्थिता ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

दैव नाम से प्रख्यात यह (नियति) जो मोह से अभिभूत न होने से शुद्ध ईश्वरसंकल्परूप है, जगत्‌ की व्यवस्थारूप से भूत, भविष्य एवं वर्तमान काल में स्थित सम्पूर्ण पदार्थो को खूब आक्रान्त कर स्थित रहती है