Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
एषैव पुरुषस्पन्दस्तृणगुल्मादि चाखिलम् ।
एषैव सर्वभूतादि जगत्कालक्रियादि वा ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
यही (महानियति ही) पुरुषचेष्टा, सम्पूर्णं तृण, पेड, पौधे,
झाड़ियाँ आदि हे, यही सम्पूर्णं पृथिवी, जल, तेज वायु आकाश-पाँच भूतस्वरूप जगत् है
ओर यही काल, क्रिया आदि स्वरूप है