Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
ज्ञानेनाकाशरूपेण दृश्यं ज्ञेयस्वरूपकम् ।
इत्येकीभूतमालोक्य ज्ञस्तिष्ठत्यम्बरोपमः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानी पुरुष आकाशरूप ज्ञान से ज्ञेयस्वरूप दृश्य को
पूर्वोक्त रीति से अपवाद द्वारा अखण्ड ब्रह्य में एकरसता को प्राप्त हुआ जानकर आकाश के
सदृश निर्मल रहता है