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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

पृथ्व्यादिरहितेनेदं चिद्भासैव स्वयंभुवा । साधितं यदि सिद्धेन ततः स्वात्मनि साधितम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

दृश्य तो जड़ है, उसकी ज्ञानघन ब्रह्म में एकरसता कैसे ? ऐसी आशंका कर आदि सृष्टि में चिन्मात्रस्वरूप ब्रह्माने अपने में ही दृश्यरूप विवर्तकी कल्पना की, इसलिए जैसे जलरूप ओलों में कठिनता का विरोध नहीं है, वैसे ही दृश्य की चिद्रूपता में विरोध नहीं है, ऐसा कहते हैं । पृथिवी आदि से रहित प्रकाशरूप ब्रह्म ने यदि इसकी कल्पना की तो अपने में ही की, उससे अतिरिक्त उसका दूसरा उपादान है नहीं, इसलिए इसके चिद्रूप होने में कोई विरोध नहीं है