Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
शान्तैव दृश्यसत्तास्याः शमनं नोपयुज्यते ।
सतो हि मार्जनक्लेशो नासतस्तु कदाचन ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि किसी को यह शंका हो कि जगत् में सत्यता के त्यागमात्र से उसकी निवृत्ति कैसे
होगी ?
दृश्य की सत्ता शान्त ही है यानी है ही नहीं, जब दृश्यसत्ता है ही नहीं, तब उसके शमन का
क्या उपयोग ? विद्यमान के मार्जन के लिए प्रयास किया जाता है, जो है ही नहीं, उसके
परिमार्जन के लिए प्रयास कैसा ?