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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 6, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 6, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

देशे यं सुजनप्राया लोकाः साधुं प्रचक्षते । स विशिष्टः स साधुः स्यात्तं प्रयत्नेन संश्रयेत् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

साधु कौन है ? ऐसी आकांक्षा होने पर कहते हैं । श्रुति और स्मृति से प्रतिपादित सदाचार में परिनिष्ठित सज्जन लोग जिसे साधु कहते हैं, वह यदि ज्ञान, वैराग्य आदि शुभ गुणों से विशिष्ट हो, तो वह साधु हे प्रयत्नपूर्वक उसकी शरण लेनी चाहिए