Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
इयं लीला द्वितीया ते महिला हेलया मया ।
उपार्जिता त्वदर्थेन प्रतिबिम्बमयी शुभा ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह लीला तुम्हारी दूसरी पत्नी है, मैंने तुम्हारी क्रीड़ा के लिए (उपभोग के लिए) इसका
उपार्जन किया है, यह सुन्दरी प्रतिबिम्बमयी है