Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verses 45–46

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, verses 45–46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 45,46

संस्कृत श्लोक

का त्वं केयं कुतश्चेयमित्याह स विलोकयन् । तस्मै लीलाह हे देव श्रूयतां यद्वदाम्यहम् ॥ ४५ ॥ महिला तव लीलाहं प्राक्तनी सहधर्मिणी । वागर्थस्येव संपृक्ता स्थिता संश्लेषशालिनी ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

उसने देखते हुए तुम कौन हो और यह कौन है तथा यह कहाँ से आई है, ऐसा पूछा, उससे पूर्व लीला ने कहा : हे देव, जो मैं कहती हूँ, उसे आप सुनें, मैं आपकी पूर्व जन्म की सहधर्मिणी लीला हूँ जैसे शब्द अर्थ का वाचक होने से अर्थसे मिलती है, वैसे ही मैं आपसे संबद्ध होकर स्थित हूँ