Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
शिरोभागोपविष्टेयं पाहि हैममहासने ।
एषा सरस्वती देव त्रैलोक्यजननी शिवा ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे देव, यह स्वर्णसिंहासन के
सिरहानेपर बैठी हुई है, इसकी आप रक्षा कीजिये । यह सरस्वती देवीजी हैं, जो तीनों लोकों
की जननी और कल्याणकारिणी है