Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
समाचारं समाकारं समरूपं समस्थिति ।
समवाक्यं समोद्योगं समानन्दं समोदयम् ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
उसने नम्र दो लीलाओं को अपने सामने उपस्थित देखा । उन दोनों का
एक-सा व्यवहार एक-सा आकार, एक-सी रूप रेखा, एक-सी मर्यादा, एक-से वचन, एक-
सा उद्योग, एक-सा आनन्द और एक-सा अभ्युदय था