Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 57, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 57, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
यथैव बोधे लीलासौ परिणाममिता क्रमात् ।
परे तथैव तस्मात्तद्धिमवद्गलितं वपुः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे-जैसे यह पूर्वलीला
क्रमश: बोध में परिपक्वतारूप परिणाम को प्राप्त हुई, वैसे-वैसे बोध से परब्रह्म में उसका
शरीर हिम की नाईं गल गया यानी बाधित हो गया