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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

यथाभावनमेतेषां पदार्थानां हि सत्यता । भावना च पदार्थेभ्यः कारणेभ्य उदेति हि ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

इन पदार्थो की सत्यता भावना के अनुसार होती है ओर भावना भी अपने कारणभूत पदार्थो से उत्पन्न होती हे । बन्धुओं द्वारा पिण्डप्रदान करनेपर अवश्य ही मृत पुरुष में पिण्डदान किया, ऐसी भावना उदित होती है, यह बात शास्त्र बतलाते हैं