Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
सपिण्डोस्मीति संवित्त्या निष्पिण्डोपि सपिण्डवान् निष्पिण्डोस्मीति संवित्त्या सपिण्डोपि नपिण्डवान् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
मुझे मेरे बन्धुबान्धवों ने पिण्ड दिया, इस बुद्धि से जिसे पिण्ड नहीं दिया गया,
वह भी पिण्डप्रदान के फल का भागी होता हे । मुझे बन्धु बान्धवां ने पिण्ड नहीं दिया, इस बुद्धि
से पिण्डप्रदान करने पर भी पिण्ड प्रदान का फल नहीं मिलता