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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verses 72–73

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verses 72–73 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 72

संस्कृत श्लोक

एवं न कश्चिन्म्रियते जायते न च कश्चन । वासनावर्तगर्तेषु जीवो लुठति केवलम् ॥ ७२ ॥ अत्यन्तासंभवादेव दृश्यस्यासौ च वासना । नास्त्येवेति विचारेण दृढज्ञातैव नश्यति ॥ ७३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार न तो कोई मरता है और न कोई पैदा होता है। केवल जीव अपनी वासनारूपी जलभौरी के गड्ढे में गिरता है