Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 71
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 71 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
वासनामात्रवैचित्र्यं यज्जीवोऽनुभवेत्स्वयम् ।
तस्यैव जीवमरणे नामनी परिकल्पिते ॥ ७१ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई पूछे तब जन्म-मरण, जिनका सबको अनुभव होता है, क्या है यानी उनका
स्वरूप क्या है 2 इस पर कहते है ।
जिसका यानी जन्म-मरण का जीव अनुभव करता है, वह केवल वासना का चमत्कार है।
उसीके (वासनाचमत्कार के ही) जीवन ओर मरण दो नाम रख दिये हैं