Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
क्रमाच्छयामलतां यान्ति तस्य सर्वाक्षसंविदः ।
यथास्तं गच्छति रवौ मन्दालोकतया दिशं ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सूर्य के अस्त होने पर मन्द-मन्द
प्रकाशवाली दिशाएँ काली हो जाती हैं, वैसे ही उसकी सम्पूर्णं इन्द्रियों की शक्त्य घुँधली
पड़ जाती हैं यानी उनकी तत्-तत् विषयों को ग्रहण करने की शक्ति मन्द पड़ जाती
है