Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
पूर्वापरं न जानाति स्मृतिस्तानवमागता ।
यथा पाश्चात्यसंध्यान्ते नष्टा दृष्टिर्दिगष्टके ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पश्चिम सन्ध्या के (सायंकाल की सन्ध्या के) बाद नष्ट हुई नेत्रशक्ति आठों
दिशाओं में पूर्वापर को नहीं जानती, वैसे ही क्षीणता को प्राप्त हुई उसकी स्मृति पूर्वापर
को नहीं जानती