Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
खत्वं जलत्वमुर्वीत्वमग्निवायुत्वमप्यसत् ।
वेत्त्यन्तः स्वप्नसंकल्पध्यानेष्विव चितिः स्वयम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे स्वप्न, संकल्प और ध्यान में असत् वस्तु को ही अन्तःकरण अपनी कल्पना से जानता
है, वैसे ही आकाशत्व, जलत्व, पृथिवीत्व, अग्नित्व और वायुत्व भी असत् है, चिति स्वयं
अपनी कल्पना से इनका अनुभव करती है