Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
एहि तत्रैव गच्छाव इत्युक्त्वा सा कुमारिका ।
पुरस्तस्याः स्थिता व्योम्नि मार्गदर्शनतत्परा ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामचन्द्रजी, “देवी ! आइए, वहींपर हम दोनों जाते हैं, यह
कहकर वह कुमारी लीला के आगे हो गई और आकाश में मार्ग दिखलाने लगी