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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, Verse 31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

यावद्वेतालसंकल्पो बालस्य किल विद्यते । निर्वेतालधियस्तावदुदयस्तस्य कः कथम् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि लीला यह पूछे कि इसे आपके वरदान के बल से अस्थूल आत्मा का ज्ञान क्यों नहीं हुआ ? इस पर देवीजी कहती है । जब तक बालक के मन में वेताल का निश्चय रहता हे, तब तक उसमे वेताल के अभाव की बुद्धि का उदय केसे हो सकता हे ?