Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 5, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 5, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
उत्पत्तिमादाविति मे समासेन वद प्रभो ।
प्रवक्ष्यसि ततः शिष्टं वक्तव्यं वदतां वर ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण जगत् की उत्पत्ति के मूलभूत हेतु को छोड़कर मन के मूलभूत हेतु के पूछने में
कहते हैं।
हे प्रभो, मन की उत्पत्ति किससे हुई ? यह पहले मुझसे संक्षेप से कहिए, अनन्तर अवशिष्ट
वक्तव्य को कहियेगा । भाव यह है कि आदिभूत मनके मूल का परिज्ञान हो जानेपर सबके
मूलका परिज्ञान हो ही जायेगा