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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 83

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, verse 83 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 83

संस्कृत श्लोक

ततो निमेषमात्रेण प्रशेमुर्मृगतृष्णिकाः । परबोधरसापूरैर्यथा संसारवासनाः ॥ ८३ ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त परमात्मा के बोधरूप निरतिशय आनन्दप्रवाह से सांसारिक वासनाओं की नाई मृगतृष्णा को पैदा करनेवाले आतपसन्ताप (प्रचण्ड सूर्य प्रकाश) पर्जन्यारत्र से एक पलक भर में शान्त हो गया