Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verses 62–63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, verses 62–63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 62,63
संस्कृत श्लोक
आययुः सलिलापूरास्तमःपूरा इवाभितः ।
अधस्तादूर्ध्वतो दिग्भ्यो द्रवरूपा इवाद्रयः ॥ ६२ ॥
भागा इव शरव्योम्नि धृतयाना इवाम्बुदाः ।
महार्णवा इवोच्चस्थाः कुलशैलशिला इव ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
उस अरत्र के प्रयोग से शरो के मार्ग के अवकाश में दसों दिशाओं से चारों ओर के अन्धकार के
प्रवाह की नाई, द्रवरूप पर्वतो की नाई, आकाश के भाग की नाई, स्थिरगति (निश्चल) बादलों
की नाई, महासागर की नाई ओर ऊपर से नीचे को लुढकाई गई कुलपर्वतों की चट्टानों की नाई
जलप्रवाह आने लगे