Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
तस्यान्तरेऽयमाभाति प्रत्येकं च जगद्गृहम् ।
किल ब्राह्मणगेहान्तर्जीवस्ते मदुपास्थितः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
शका - तो क्या वही ब्रह्माण्ड जगत् इस प्रकार प्रतीत होता है ?
समाधान - नहीं, प्रत्येक यानी भिन्न-भिन्न जगद्-रुपी घर ब्राह्मणगृह के अन्दर है और
मेरे भक्त तुम्हारा जीव भी ब्राह्मण के घर के अन्दर है