Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verses 42–43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, verses 42–43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
चिरकालप्रत्ययतः कल्पनापरिपीवरः ।
आधिभौतिकताबोधमाधत्ते चैष बालवत् ॥ ४२ ॥
ततो दिक्कालकलनास्तदाधारतया स्थिताः ।
उद्यन्त्यनुदिता एव वायोः स्पन्दक्रिया इव ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
चिरकालिक प्रत्यय से कल्पना द्वारा
स्थूल हुआ वह आतिवाहिक स्वरूप बालक की नाई मेँ आधिभौतिक हूँ, इस प्रतीति को धारण
करता है