Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
तदेवोच्छूनमाबुद्धं भवतीन्द्रियपञ्चकम् ।
तदेव बुध्यते देहः स एषोऽस्यातिवाहिकः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तरे
ही कुछ स्थूल होकर पाँच इन्द्रियरूप से उद्बुद्ध होते हैं । वे ही स्वप्न ओर जाग्रत मेँ देहरूपसे
ज्ञात होते हैं, वही जीव का आतिवाहिक स्वरूप हे