Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
असत्यमेव वारित्वं बुद्ध्योदेतीव तत्तथा ।
वन्ध्यापुत्रोऽयमस्तीति यथा स्वप्ने भ्रमो नरः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे
मृगमरीचिका आदि में मिथ्या जल का उदय होता है एवं जैसे स्वप्न में यह स्फुरण वन्ध्यापुत्र
हे ऐसे भ्रम का उदय होता है, वैसे ही यह आकाशात्मा भी स्वनिष्ठ असत्यबुद्धि द्वारा महान्
(ब्रह्माण्डात्मा) होकर प्रस्तुतता को प्राप्त हुआ है